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Vrat ke niyam


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।। व्रत के नियम ।।

  1. व्रत करने वाले व्यक्ति को क्रोध, लोभ, मोह, आलस्य, चोरी, इर्ष्या आदि नहीं करना चाहिए । व्रती को क्षमा, दया, दान, शौच, इन्द्रिय निग्रह देव पूजा, अग्नि होत्र और संतोष से काम करना उचित और आवश्यक है ।
  2. व्रत के समय बार-बार जल पीने, दिन में सोने, तम्बाकू चवाने और स्त्री सहवास करने से व्रत बिगड़ जाता है ।
  3. जल, फल, फुल, दूध, दही, औषधि के सेवन और गुरु (पूज्यजनों ) के वचन इनसे व्रत नहीं बिगड़ता ।
  4. होमावाशिष्ट खीर, सतु (भुने हुए जौ का चूर्ण ), जौ, शाक ( तोरई, ककड़ी, मेथी, आदि ), गौ दुग्ध, दही, घी, मूल, आम, नारंगी  और कदली फल ( केला ) व्रत में खाने योग्य हैं ।
  5. व्रत में गंध, पुष्प, माला, शुभ, स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए । सौभाग्यवती स्त्रियों को विष्णु धर्म के अनुसार व्रत-पूजाओं में लाल वस्त्र धारण करने चाहिए ।
  6. व्रत करने वाले व्यक्ति के लिए आचमन करना आवश्यक है । नहाते-धोते, खाते-पीते, सोत्ते, चिंक लेते समय और गलियों में घूमकर आने पर यदि आचमन किया हुआ हो तो भी दुबारा करना आवश्यक है । यदि जल न मिले तो दक्षिण कर्ण का स्पर्श कर ले । हाथ के पौरुओं को बराबर करके हाथ को गौ के कान जैसा बनाकर आचमन करें ।
  7. अधो वायु ( अपाक्ष्वाक ) के निकल जाने, रोने, क्रोध, करने विल्ली और चूहे से छू जाने के बाद,म जोर से हंसने और झूंठ बोलने पर जल स्पर्श करना आवश्यक होता है ।
  8. बहुत दिनों में समाप्त होने वाले व्रत का पहले संकल्प कर लिए हो तो उसमें जन्म और मरण का सूतक नहीं लगता। व्रतों में अशौच आने पर व्रत करते रहें दान और पूजा न करें ।
  9. वादे व्रतों का प्रारंभ करने पर स्त्री रजस्वला हो जाए, तो उससे भी व्रत में कोई बाधा नहीं आती ।
  10. व्रत में, तीर्थ यात्रा में, अध्ययन काल में तथा श्राद में दुसरे का अन्न लेने से जिसका अन्न होता है, उसी को पुन्य प्राप्त होता है।
  11. किसी विपत्ति, रोग अथवा यात्रा के कारण धर्म-कर्म अपने से न हों सके तो अपना प्रतिनिधि बनाकर उससे कराया जा सकता है ।यदि इनमे से कोई उपलब्ध न हो तो यह काम ब्राह्मण से कराया जा सकता है ।

।। व्रत किस प्रकार करें ।।

मनुष्यों के हित के लिए महर्षियों ने अनेक साधन बतायें हैं उनमें एक साधन व्रत भी है ।

मनुष्य जीवन को सफल बनाने में व्रत की बड़ी महिमा मानी गई है । देवल के अनुसार व्रत और उपवास के नियम पालन से शारीर को तपाना ही तप है ।

व्रत में भोजन किया जा सकता है । उपवास में निराहार रहना पड़ता है । इनके तीन भेद हैं । 

शास्त्रघत्त, ममाघात और कार्य हनी आदि जनित हिंसा के त्याग के कायिक ।

सत्य बोलने और प्राणी मात्र से निर्वेर रहने से वाचिक ।

मन को शांत रखने की द्रढ़ता से मानसिक व्रत होता है ।

भले हो व्रत-उपवास का वास्तविक अर्त्थ कुछ भी हो लेकिन जनमानस में यह धर्म, आस्था एवं श्रद्धा का प्रतीक है । कुछ लोग इसे धर्म के सात्त जोडकर देखते हैं जो कुछ ज्योतिष उपायों की तरह लेते हैं । स्वास्थ्य की द्रष्टि से इसके अलग लाभ है ततो मनोविज्ञान की द्रष्टि से इनका अपना महत्त्व है । शायद ये कारण है । की व्रत-उपवास का चलन सदियों नहीं युगों पुराना है ।

।। भक्ति का सहज भाव ।।

देखा जाये तो व्रत-उपवास को किसी ने कहीं से पढकर या देखा-देखि नहीं शुरू किया वल्कि परमात्मा में लीं भक्तों का यह्ग सहज, स्वतः भाव था जिसे व्रत-उपवास कहना भी गलत है । क्योंकि उन्होंने सोच समंकर किसी फल की प्राप्ति या भगवन को प्रसन्न करने के लिए व्रत नहीं किए बल्कि वह भगवान के धयान में, भक्ति में इतने लीं हो गए थे की उनका खाना-पीना, सोना-जागना अपने आप से तथा सांसारिक कीयाकलापों एवं औपचारिकताओं से अपने आप छुट गए हैं ।

बागवान की यादसंसार की मोह-माया में, चमक-धमक में लोग भगवन को कहीं न भूल जाएँ इसलिए व्रत-उपवास को रोजमर्रा की जिन्दगी में शामिल किया गया ताकि इसी बहाने से लोग भगवन का स्मरण तो करेंगे । लोग चाहते थे इसन को यह सदा याद रहे की उससे शक्तिशाली भी कोई है हो सदा हमें देखता परखता रहता है । यदि व्रत-उपवास को लोग करते रहेंगे तो संबंधित रीती-रिवाज, संस्कार-परंपराओं तथा धार्मिक कर्मकांड एवं अनुष्टान आदि का महत्त्व एवं अस्तित्व कभी धुंधला नहीं पड़ेगा ।

।। धार्मिक आस्था ।। 

व्रत-उपवास का मुख्य कारण रहे हमरे धार्मिक शास्त्र जिनके द्वारा इंसान को पंडित पुरोहित एवं ऋषि मुनियों द्वारा देवी-देवतता का व उनसे जुड़े वारों का ज्ञान हुआ । इस बात का पता चला कि फला व्रत करने से फला देवी-देवतता प्रसन्न होते हैं । व्रत-उपवास को भक्ति का,परमात्मा को पाने का एक मार्ग बताया गया जिसके चलते लोगों में न केवल उत्सुकता जगी बल्कि भगवान को पाने तथा मोक्ष प्राप्त करने की गहरी आस्था भी जगी और लोग व्रत-उपवास द्वारा भगवान् को प्रसन्न करने में जुट गए ।

 

1 comment on “Vrat ke niyam

    Andy

    • February 27, 2021 at 10:21 am

    Good writing 👍

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