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Surya Rekha


।। surya rekha ।।

।। सूर्य रेखा ।।

हाथ में सूर्य रेखा कहीं से भी प्रारंभ हो, इसका अंत प्रायः सूर्य पर्वत पर होता है, इस लिए इसे सूर्य रेखा कहते हैं ।

कई हाथों में यह रेखा होती ही नहीं । अवय हत्थों में यह खली ह्रदय रेखा से आरम्भ होकर सूर्य पर्वत तक जाती है अथवा हाथ में यह रेखा अस्पस्ट-सी देती है ।

  • इस रेखा से जातक की कला, साहित्य, व्यापर, में रूचि और सफलता तथा प्रसिद्धि का अनुमान लगाया जाता है । इस रेखा के स्पस्ट होने पर जातक को समाज में मान-सम्मान मिलता है । धन संपत्ति चाहे मिले न मिले । इसके यश और प्रसिद्धि और समाज में जातक की पदवी का ज्ञान होता है ।
  • इस रेखा को भाग्य रेखा की पूरक रेखा माना जाता है । प्रायः हाथों में भाग्य रेखा 40, 45, 60 साल की आयु तक पहुचने के बाद भाग्य रेखा समाप्त हो जाती है तब इसके आगे प्रायः सूर्य रेखा के होने से जातक कोसुख,धन-संपत्ति, यश, प्रसिद्दी की कमी नहीं रहती । ऐसे हाथों में अगर सूर्य रेखा न हो तो जीवन का अनितं भाग गरीबी में कटता है ।
  • अगर सूर्य रेखा जन्जिर्दार हो तो प्रसिद्ध और धन-संपत्ति के मामले में कम सफलता मिलोती है ।
  • अगर हाथ में सूर्य रेखा बिलकुल न हो तो जातक का जीवन साधारण स्टार का होता है , कोई विशेष उतार-चढाव नहीं होता। अगर ह्रदय रेखा से सूर्य रेखा आरम्भ हो तो तो जातक को बुढ़ापे में सुखी एवं धनी जीवन व्यतीत करने का अवसर प्राप्त होता है ।
  • अगर सूर्य रेखा न हो अथवा न के बराबर हो और स्वास्थ्य रेखा के बिच में द्वीप हो एवं भाग्य रेखा को छोटी रेखाएं कट करें तो जातक दिवालिया हो जाता है ।
  • अगर सूर्य रेखा दोनों हाथों में हो, मस्तिक रेखा निचे की और चनर क्षेत्र के बिच तक आए ।
  • अगर सूर्य रेखा जीवन रेखा से निकल कर ऊपर जाए तो जातक को कला तथा साहित्य एवं धन प्राप्ति में सफलता मिलती है परन्तु इसमें उसके घर परिवार का शुरु में योगदान अवश्य होता है ।
  • अगर सूर्य रेखा, मस्तक रेखा और हरदे रेखा के बिच में न हो तो अनचाही घटनाओं के कारण 35 वर्ष से ५० वर्ष के बिच जातक के जीवन भविष्य पर बुरा प्रभाव पड़ेगा ।
  • अगर सूर्य रेखा, सूर्य पर्वत पर पहुचते ही विभिन्न रेखाओं में बंट ज्जाये तो असफलता की सूचक है ।
  • अगर हाथ में स्पस्ट और सीधी सूर्य रेखा हो और उसके अंत में सूर्य पर्वत पर तारे का चिन्ह हो तो जातक को किसी क्षेत्र में सफलता और प्रसिद्धि मिलती है जिससे समाज में उसे ऊँचे दर्जा मिलता है ।
  • अगर मंगल से सूर्य रेखा निकलकर सूर्य पर्वत पर जाय तो जातक धन-संपत्ति और प्रसिद्धि हासिल करने के लिय कुछ भी कर सकता है ।
  • अगर सूर्य रेखा से ऊपर जाने वाली शाखों को आदि रेखायें काटें तो जातक के मन की एकाग्रता की कमी के कारण असफलता का सामना करना पड़ता है ।
  • अगर सूर्य रेखा के अंत में सूर्य पर्वत पर त्रिशूल बन जाय तो वो जातक अपने व्यक्तिगत गुणों के कारण धन-संपत्ति और प्रसिद्धि हासिल करता है ।
  • अगर सूर्य तिन बड़ी बराबर की शाखाओं में बट जाए,एक शनि पर्वत और तीसरी बुध पर्वत पर जाएँ तो जातक को अत्यधिक धन संपत्ति तथा प्रसिद्धि प्राप्त होती है ।
  • अगर सूर्य रेखा सूर्य पर्वत पर जाकर दो बराबर शाखाओं में बंट जाए तो जातक का धयान दो महत्वाकांक्षाओं में बटने के कारण किसी को भी पूरी करने में असमर्थ रहता है ।
  • अगर सूर्य रेखा बराबर टूटती चली जाए तो एसा व्यक्ति बिभिन्न व्यवसाय करता है परन्तु किसी में भी धन व् ख्याति हासिल नहीं कर पता ।
  • अगर चत्रभुज के बिच सूर्य रेखा टूट जाए और दोबारा ह्रदय रेखा से शुरू होकर सूर्य पर्वत तक आए तो जातक को मध्यायु में संघर्ष करना पड़ता है परन्तु बुढ़ापा आराम से व्यतीत होता है क्योनिक अंततः सफलता मिलती है ।
  • अगर सूर्य रेखा, सूर्य पर्वत पर पहुचकर तिन शाखाओं वाला फोर्क बने, बहार की दो शाखाएं अन्दर की और मुडती हुई झुकें तो इसका मतलब है की जातक किसी बड़ी धन-संपत्ति को हासिल करना चाहता था जिससे वह वंचित रह गया ।
  • अगर विवाह रेखा, सूर्य रेखा को काट दे तो जातक अपने अनमेल विवाह के कारण अथवा अपमानजनक प्रेम बंधन के कारण समाज में अपने ऊँचे पद को खो बैठता है और उसके कारोवार पर भी इसका बुर असर पड़ता है ।
  • अगर सूर्य रेखा चन्द्र पर्वत से आरम्भ होकर सूर्य पर्वत तक जाय तो जातक को किसी बहरी स्त्री, स्त्री हो तो बहरी पुरुष की सहायता अथवा संरक्षण मिलने पर अपने कारोबार में सफलता मिलती है ।
  • अगर चन्द्र पर्वत से निकली सूर्य रेखा के साथ-साथ हाथ में मस्तक रेखा चन्द्र पर्वत पर निचे की और आए तो जातक को कविता-कहानी लेखन अथवा चित्रकारी में सफलता एवं प्रसिद्धि मिलती है ।
  • अगर त्रिभुज के भीतर से सूर्य रेखा निकलकर सूर्य पर्वत तक जाए तो जातक लम्बे संघर्ष के बाद सफलता मिलती है जिसमें किसी का भी योगदान नहीं होता है ।
  • अगर सूर्य रेखा, मस्तक रेखा से निकले तो जातक अपने बूढी बल से जीवन में सफलता हासिल करता है, एसा जीवन के मध्ययु में होता है ।
  • अगर सूर्य रेखा ह्रदय रेखा से निकलकर सूर्य पर्वत पर आए तो जातक को बुढ़ापे में आर्थिक टंगी नहीं झेलनी पड़ती ।
  • हाथ में अच्छी जीवन रेखा हो, अच्छी सूर्य रेखा हो और गुरु पर्वत उभरा हुआ हो तो व्यक्ति सुलझे हुए दिमाग वाला तथा परिश्रमी होता है । भविष्य बारे अपने लक्ष्य में सफलता प्राप्त करता है ।
  • अगर अच्छी सूर्य रेखा के साथ-साथ एक लम्बी मस्तक रेखा हो और अनामिका भी लम्बी हो तो जातक सट्टे में अच्छा धन कमाता है ।
  • अगर हथेली बिच में बीच ओर गहरी हो  तो अच्छी सूर्य रेखा होते हुए भी जातक धन-संपत्ति और प्रसिद्धि प्राप्त करने में सफल रहता है ।
  • अगर शुक्र क्षेत्र से कोई प्रभाव रेखा आकर सूर्य रेखा को काटे, तो कोई रिश्तेदार की वजह से जातक के धन का नाश होता है ।
  • अगर शुक्र क्षेत्र से निकल कर कोई प्रभाव रेखा, जीवन रेखा से ऊपर निकली हुई शाखा को कटती हुई सूर्य रेखा को स्पर्श करे तो जातक किशी रिश्तेदार से मुकद्दमा जीत जाता है ।
  • अगर प्रभाव रेखा, सूर्य रेखा को काट दे तो रिश्तेदार के साथ मुकद्दमें में हार होती है ।