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Shankh Vichar


शंख विचार

एक शंख नर सुखी कराई, दो शंख दरिद्री के भाई.

तृतीय शंख से निर्गुण बखाने, चार शंख में गुण बहु जाने.

पांच शंख से निर्धन होई, छठा शंख जाने सब कोई.

सात आदि से शंख दश इतने जो पाय.

राजा कहिये दास को, चले निशान बजाय.

अँगुलियों के उर्ध्व भाग को भली प्रकार से देखें. यदि अँगुलियों के उर्ध्व भाग में शंख की आक्रति हो तो, उनकी गणना करें और फल निम्न प्रकार से जानें.

  1. तर्जनी अंगुली- गुरु की तर्जनी अंगुली में शंख हो तो एसा जातक मित्रों से द्वेष करने वाला होता है, और इसके मित्र इसके पतन तथा धन हनी में सहायक हुआ करते हैं.
  2. मध्यमा अंगुली – शनि की माध्यम अंगुली में यदि शंख हो तो एसा जातक देव प्रकोप से दुखी होता है, और धन का व्यय देव कार्यों में किया करता है.
  3. अनामिका अंगुली – सूर्य की अनामिका अंगुली में यदि संख होतो जातक सांसारिक कार्यों में धन व्यय करता है, तथा जीवन परेशानियों से युक्त रहता है.
  4. कनिष्ठा अंगुली – बुध की अंगुली का शंख व्यापर में जातक, लाभ कम व् हनी ज्यादा कराता है. एसा जातक व्यर्थ के कामों में धन का खर्च किया करता है.

1. एक शंख – यदि जातक के हाथ की अँगुलियों की शंख-संख्या एक हो तो एसा जातक सुखी, अध्ययन करने वाला पराक्रमी, तथा धनवान होता है.

2. दो शंख – यदि जातक के दोनों हाथों की अँगुलियों में शंख संख्या दो हो तो जातक धनहीन, होता है. अनेक प्रकार के प्रयत्न करने पर भी, धन इसके पास नहीं रुक पाता है. इस कारण यह जातक, कष्टमय जीवन व्यतीत करता है अथवा इस प्रकार का जातक साधु हो जाया करता है.

3. तीन शंख – जिस जातक के हाथ में यदि तिन शंख हों तो एसा जातक न तो विद्वान होता है, और न धनवान ही. परन्तु एसा जातक, काम प्रिय, भोगी तथा विलासी होता है वह इसलिये यह स्त्री सेवा में रत रहकर, अपनी इच्छा त्रप्ति किया करता है.

4. चार शंख – जिस जातक के हाथ में चर शंख हों तो एसा जातक विशेष गुणवान होता है. यह अनेक प्रकार की, शिल्प कला तथा ललितकलाओं की पूर्ण जानकारी रखता है तथा विशेष अध्ययन किया करता है. इस कारण, इसका स्वास्थ गिरा हुआ रहता है फिर भी वह सुखमय जीवन व्यतीत करता है.

5. पाँच शंख – जिस जातक के हाथ में शंखों की संख्या पाँच हो तो एसा जातक, विद्वान होता है. परन्तु ऐसे जातक के पास, लक्ष्मी की कमी रहा करती है तथा यह विदेश-यात्रा करके अपनी जीविका चलाया करता है.

6. छः शंख – जिस जातक के हाथ की अँगुलियों में छः शंख हों तो एसा जातक, अनेक भाषाओँ का ज्ञाता, विद्वान तथा धनवान होता है. समाज में ऐसे जातक की प्रतिष्ठा, खूब होती है.

7. सात शंख – सात शंख वाला जातक, धनहीन व् प्रबल काम-वासना में लिप्त होता है. बुरे काम कामों में, इसका मन बहुत लगता है.

8. आठ शंख – आठ शंखों से युक्त जाथक, विद्वान, समाज में प्रतिष्ठित धनवान व् योग्य व्यक्ति होता है.

9. नौ शंख – नौ शंख वाला जातक गायन-विद्या, नाच-डांस का व् सुन्दर स्त्रियों से प्रेम करने वाला होता है.

10. दस शंख– दस शंखों वाला व्यक्ति, यशस्वी, धन व् सुन्दर पत्नी का स्वामी होता है.

“अँगुलियों में शंख “

तर्जनी – अंगुली में शंख वाला व्यक्ति, मित्रों से द्वेष रखने वाला तथा मित्रों से ही, हनी उठाने वाला होता है.

मध्यमा – अंगुली में शंख वाले व्यक्ति को देवताओं के प्रकोप का भजन होना पड़ता है. देव-कार्यों में इसका धन खर्च होता है.

अनामिका – अंगुली में शंख हो तो व्यक्ति सांसारिक उपभोगों पर धन खर्च किया करता है तथा जीवन भर परेशां रहता है.

कनिष्ठा – अंगुली में शंख का चिन्ह होने से, व्यक्ति को व्यापार में लाभ कम व् हनी अधिक होती है. वह धन का खर्च भी अक्सर व्यर्थ की कामों पर ही किया करता है.

अंगूठे का शंख – चिन्ह व्यक्ति को कठोर परिश्रमी बनता है. पिता व् दादा का धन व् संपत्ति को इसको मिला करता है. परन्तु उसे कोई निसंतान दम्पति गोद ले लिया करता है. फिर वह दत्तक-पुत्र कहलाता है. इसी प्रकार, सीपों की संख्या भी पल कथन किया करती है. यदि अनुलियों को मिलाकर देखा जाए तो किसी हाथ में अँगुलियों में अंतर नहीं होता. परन्तु कुछ अँगुलियों में अंतर पाटा जाता है. जिसकी अँगुलियों मी कहीं भी अंतर न दिखाई दे तो एसा जातक, बदनामी करने वाला कोई काम नहीं करता. उसका जीवन उछ आदर्शों वाला, शान्तमय, सुखों से भरपूर व् परेशानियों से दूर या रहित होता है.