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Mesh-Rashi


( च, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ )

मेष राशि – दुर्बल शारीर, चौड़े कंधे, पिंगल वर्ण,आत्मबली, प्रतापी, गंभीर, उदार रोगी, आधिक मित्रों वाला, उदार सत्यवादी, युद्धप्रिय एवं महत्वाकांक्षी होता है. इस राशी में सूर्य उच्च का माना जाता है, जिसके कारण जातक यशस्वी, धनवान तथा पित्त विकार से पीड़ित रहता है. बाल्यावस्था तथा किशोरावस्था में जल-भय रहता है.

मेष राशि प्रधान व्यक्ति स्वतन्त्र निर्णय लेने में समर्थ होता है. कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी वह अपने आप पर नियन्त्रण रखने में समर्थ होता है, तथा विपत्तियों का डटकर मुकाबला करने का हौसला रखता है, साहसिक कार्य करने में उसे आनंद आता है, लड़ने-भिड़ने की प्रव्रत्ति उसमें सहज रूप से पाई जाती है.

ऐसे जातक का शारीर भी बलिष्ठ होता है, लम्बे-चौड़े, डील-डौल का एसा व्यक्ति तीखे नख-शिख रखता है और पैनी द्रष्टि से परिस्थिति को भापने की उसकी शक्ति होती है, विशाल और उन्नत मस्तिष्क और केश एवं आकर्षक व्यक्तित्व लिए हुए होता है.

इनकी आखों में रक्तता की मात्रा कुछ अधिक ही होती है. यधपि ऐसे व्यक्ति दुर्द्धष संघर्षशील  होते हैं पर कभी करुनाधिक्य से वे जरूरत से ज्यादा द्रवित हो जाते हैं. प्रेम के क्षेत्र में ये अधिकतर असफल रहते है, परन्तु साथ ही जिसका विशवास कर लेते है, उस पर अपने आप को न्योछावर करने में भी नहीं हिचकिचाते.

मेष राशि प्रधान व्यक्तियों के सम्बन्ध में एक और बात दिखाई देती है, वह यह की वे बिज्ञान संबंधी कार्यों में गहरी दिलचस्पी लेते हैं. यही नहीं अपितु वे जटिल मशीनरी कार्यों में गहरी आस्था रखते हैं. जिन बालकों की कुण्डली में मेष तत्व प्रधान हो, उनके माता-पिता और अभिभावकों को चाहिए की वे उसे कोई इसी प्रकार की शिक्षा दिलावें, जिसमे मशीनरी कार्य हो या वैज्ञानिक या विज्ञानं सम्बन्धी कार्य.

ज्योतिष का सहारा न लेने से माता-पिता उसे किसी ऐसे विषय में शिक्षा दिलाने को प्रवृत्त कर देते हैं, जो उसकी रूचि का नहीं होता. इसका फल यह होता है की आगे चलकर छात्र न ऊँची शिक्षा प्राप्त कर सकता है और न उस विषय में उच्च स्तर ही प्राप्त कर प्राप्त कर सकता है.

इस तत्व की प्रधानता रखने वाले व्यक्ति योजना कार्यों में भी निपुण होते हैं, वे जो कुछ भी कार्य करने की सोचेंगे, उसे व्यवस्थित एवं योजनाबद्ध रूप से करेंगे, परन्तु साथ ही उनमें एक यह भी प्रव्रत्ति होती है की वे स्वतन्त्र चेता होते है, दूसरों की गुलामी या नियन्त्रण में रहकर अपना समुचित विकास नहीं कर पाते.

खुले हुए व्यक्त्तित्व के साथ-साथ वे स्पस्टवादी होते हैं, मुह पर उसे खरी-खरी बातें निर्भीक भाव से कह देना ऐसे जातकों की विशेषता होती है, परन्तु यदि मेष राशि तत्व प्रधान हो जाता है, तो वे मुहफट भी हो जाते हैं और कई बार तो एसा देखा गया है की वे दुस्साहसी भी हो जाते हैं. साथ ही ऐसे व्यक्ति क्रोधित भी बहुत जल्दी हो जाते हैं. जितना जल्दी उन्हें गुस्सा आता है उतना ही जल्दी उतर भी जाता है, परन्तु गर्म स्वभाव के कारण तुनक मिजाज भी बन जाते हैं.

यदि ऐसे व्यक्ति अधिकारी होते हैं, तो अपने सहायकों के बीच शीघ्र ही अलोकप्रिय हो जाते हैं और मित्रो तक का अपमान कर देने के कारण अलग-थलग भी पड़ जाते हैं. परन्तु साथ ही साथ ऐसे व्यक्ति में एक गुण होता है और वह यह कि ऐसे जातक सुन्दरता की सराहना करने वाले होते हैं तथा कामुक-भावुक किस्म के होते हैं. जीवन में नियंत्रण करने की ताकत भी इनमे गजब की होती है. चित्रकला, संगीत, नाटक और काव्य में भी ये गहरी आस्था रखते हैं.

इनके विचार सुलझे हुए और स्पष्ट होते हैं परन्तु यदि मेष तत्व अकारक या बाधक होता है, तो इसका प्रभाव इनके मस्तिस्क पर होता है, फलस्वरूप स्मरण शक्ति में कमजोरी ले आता है. दिमाग संबंधी परेशानियाँ और बीमारियाँ सहजतः हो जाती हैं. यदि शनि तत्व प्रधान हो तो निश्चित ही वह दिमाग में खराबी ले लेता है तथा इससे जातक परेशां रहता है.

साथ ही मेढ़े के जो गुण या दुर्गुण होते हैं, वे सहजतः इनमे पाए या देखे जा सकते हैं.