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mastak rekha

Mastak Rekha

।। मस्तक रेखा ।।

इसे शीर्ष रेखा अथवा मस्तिष्क रेखा भी कहते हैं  यह रेखा ब्रहस्पति क्षेत्र के नीचे उद्गम स्थान से निकल कर मंगल क्षेत्र या चन्द्र क्षेत्र की और जाती है  

  • अगर मस्तक रेखा चलती हुई ह्रदय रेखा की और झुक कर फिर अपने रास्त्र पर चले तो जातक जिनसे प्यार करता है, वह उससे बेबफाई करते हैं और वह उनके प्यार में पागल हुआ करता है
  • अगर मस्तिक रेखा 1. छोटी और स्पस्ट हो अथवा 2. लम्बी और कमजोर हो तो जातक किसी भी मामले में निश्चित फैसला नहीं कर पाता । उसका मन चंचल, अस्थिर रहता है ।
  • अगर मस्तक रेखा हाथ में न हो तो जातक मूर्ख होता है, खर दिमाग होता है, दिमागी रोगी भी हो सकता है ।
  • अगर मस्तक रेखा लम्बी, सीधी और स्पष्ट हो तो जातक कुशाग्र बुद्धि वाला होता है, सोचने-समझने की शक्ति अच्छी होती है ।
  • यदि यह रेखा जीवन रेखा को स्पर्श करती हुई लम्बी और स्पष्ट होकर मंगल क्षेत्र तक व्यक्ति शमन में निपुण होता है । उसके मन में अधिकार और महत्वाकांक्षा की भावना प्रवाल होती है । ब्रहस्पति क्षेत्र और जीवन रेखा के संयोग से जातक में बौद्धिक शक्ति तथा प्राण शक्ति में समन्वय होता है । उसमें सहस, विचार शक्ति, सावधानी और सतर्कता पर्याप्त मात्र में होती हैं ।
  • अगर मस्तक रेखा चन्द्र पर्वत के बीच तक जाए तौर तर्जनी के दुसरे पर्व में कड़ी रेखाए हों तो व्यक्ति ज्योतिष तंत्र-मन्त्र विधाओं में पारंगत होता है ।
  • अगर मस्तक रेखा थोडा चल कर शुक्र पर्वत की और मुड़े, तो जातक डरपोक बनता है और उसमें शक्ति की कमी होती है ।
  • अगर सूर्य, बुध पर्वत उभरे हुए हों, भाग्य रेखा, सूर्य रेखा अच्छी हो तब मस्तक रेखा चन्द्र पर्वत तक नीचे तक आए तो जातक छोटी आयु में ही बड़ा कलाकार संगीतज्ञ  होता है ।
  • अगर मस्तक रेखा उदगम स्थान पर जीवन स्थान स्थान पर जीवन रेखा से जुडी हुई हो और अर्धवृत बनती हुई चन्द्र पर्वत पर आए तो जातक का कल्पनाशील व्यक्तित्त्व उसके बौद्धिक विकास को प्रभावित करता है परन्तु अगर चन्द्र पर्वत के अन्दर तक चीरती हुई जाए तो यह आत्य्धैक आध्यात्मवाद ओर रुढ़िवाद का घोतक है ।
  • अगर मस्तक रेखा की और सरकती जाए तो जातक को बेहोशिके दौरे भी पद सकते हैं ।
  • अगर मस्तक रेखा पर नीली बिंदु हो तो यह मलेरिया, टाईफायिड, ज्वर होने का संकेत है । अगर लाल बिंदु हो तो व्यक्ति अक्सर बुखार का शिकार रहता है ।
  • अगर मस्तक रेखा पर काला बिंदु हो तो यह गंभीर रोग होने का संकेत है अगर गहरा काला बिंदु हो तो घटक जख्म होने का संकेत है ।
  • अगर मस्तक रेखा सीधे छड की तरह जीवन रेखा से जुड़ कर निकले और हथेली के पार तक जाए तो यह जातक को लालची स्वार्थी, भौतिकवादी बनती है ।
  • अगर मस्तक रेखा, जीवन रेखा से निकलकर इसके पास-पास कुछ देर चले तो व्यक्ति की बुद्धि ठीक तरह सोच-समझ नहीं पाती ।
  • अगर मस्तक रेखा मंगल के अन्दर से निकले तो जातक बड़ा क्रोधी स्वभाव का होता है ।
  • अगर मस्तक रेखा पर छोटे-छोटे द्वीप हों तो क्षय रोग होने का डर है ।
  • अगर मस्तक रेखा उदगम स्थान पर जीवन रेखा से जुडी हुई न हो तो अच्छे हाथ में यह आत्मनिर्भरता दर्शाती है । अगर साथ में मंगल और ब्रहस्पति के पर्वत उन्नत हों, तो व्यक्ति में अत्यधिक विशवास बताती है ।
  • अगर मस्तक रेखा और ह्रदय रेखा के बिच में क्रास हो तो यह अत्यधिक जोश दर्शाता है । इस क्रास को Mystic cross भी कहते हैं ऐसे व्यक्ति में आत्मिक ज्ञान और देवी शक्ति मानी गई है ।
  • अगर मस्तक हो अथवा छोटी हो, साथ में स्वास्थ्य रेखा अनियमित रूप में चले तो जातक को अपचन, सिरदर्द अक्सर रहता है ।
  • अगर मस्तक रेखा अंत में तिन शाखाओं में बँट जाए तो व्यक्ति डिप्लोमैट होता है । इसमें से अगर एक शाखा चन्द्र पर्वत तक जाए और दूसरी शाखा बुध पर्वत तक जाए और दूसरी शाखा बुध पर्वत तक जाए तो व्यक्ति में अद्भुत दिमागी शक्ति, व्यापारिक क्षमता और कल्पना-शील का संगम होता है ।
  • अगर मस्तक रेखा अंत में दो पाखाओं में बँट जाए, एक शाखा चन्द्र तक जाए, एक शाखा चन्द्र पर्वत तक जाए और दूसरी बुध पर्वत तक जाए और  दूसरी बुध पर्वत तक जाए तो व्यक्ति चालबाज, दुसरे को अपने शब्दजाल के वश में कर लेता है और धन को प्राप्त करने के लिए किसी भी अछे बुरे साधन को अपना सकिता है ।
  • मस्तक रेखा अंत से एक शाखा मस्तिष्क रेखा के साथ बड़ा फोर्क बनती हुई चन्द्र क्षेत्र पर आय तो जातक अपनी योग्यता से धन कमाने में सफल होता है ।
  • अगर मस्तक रेखा सीधी हथेली के दुसरे छोर तक जाए, गुरु और शुक्र पर्वत दबे हुए हों । अंगूठा अन्दर की और मुदा हुआ हो, अंगुलियाँ एक दुसरे से सटी हुई हों तो जातक स्वार्थी, कंजूस होता है ।
  • मस्तक रेखा अंत में अर्घ वृताकार चलती हुई बुध पर्वत की और मुड जाए तो जातक किसी भी मामले को नीति ओर चतुरी से हल करता है ।
  • अगर मस्तक रेखा लहरदार होकर स्वास्थ्य रेखा की और मुड जाए तो जातक दिमाग पीड़ित रहता है, जातक उदास और अस्वस्थ रहता है ।
  • अगर मस्तक रेखा दे अंत में छोटा फोर्क हो, जिसकी एक शाखा ह्रदय रेखा को स्पर्श करे, दूसरी चन्द्र पर्वत को स्पर्श करे, दूसरी चन्द्र पर्वत को स्पर्श करे, तो जातक अपने प्यार की खातिर सब कुछ त्याग देता है ।
  • अगर भाग्य रेखा चलती हुई ह्रदय रेखा पर रुक जाए तो वाही फल होता है जो ऊपर किया गया है-प्यार की खातिर, जातक का सब कुछ त्यागना ।
  • अगर जीवन रेखा के आरम्भ में गुणा के चिन्ह और उस पर बिंदु भी हो तो जातक का बचपन में ही एक्सीडेंट होता है ।
  • अगर जीवन रेखा पर किसी स्ताहन पर तारे का चिन्ह हो तो यह किसी दुर्गातना से गटक चोट का लगना बताता है ।
  • अगर जीवन रेखा पर क्रास का चिन्ह हो तो निचे की और आती हुई शाखा को काटे तो जातक को एसा रोग होगा जिसका उसको जीवन भर सामना करना पड़ेगा ।
  • अगर जीवन रेखा पर दो व्रत हों तो यह अंधापन दर्शाता है । अगर एक व्रत हो तो एक आँख अंधी होती है ।
  • अगर जीवन रेखा पर कोई द्वीप बने, साथ ही मस्तक रेखा पर तारे का चिन्ह तो तो जातक को उस उम्र में गंभीर बीमारी का सामना करना पड़ता है, जहाँ पर जीवन रेखा पर द्वीप बने ।
  • अगर यह तारा शनि पर्वत के निचे मस्तक रेखा पर बने तो जातक को निचे के किसी अंग पर बीमारी का बुर असर पड़ सकता है ।