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Kundali ghar and grah vichar


 

कुंडली घर और गृह फल विचार

कुंडली घर

कुंडली देखने में घर 1, 2, 3,  जो नंबर लिखे हुए हैं उन्हें घर कहते हैं ये घर ( 1 से 12 ) तक होते  हैं । और इन्हें भाव भी कहते है जेसे कि प्रथम भाव , द्वितीय भाव, तृतीय भाव, … द्वादश भाव ।

गृह विचार

जिस घर में जो गृह होता है उसी गृह का विचार देखा जाता है । जैसे 1 नंबर घर में जो गृह होगा उसका विचार 1 नंबर घर में बैठे हुए गृह को देखते हुए विचार करेंगे ।

घर व् गृह के सामान्य उपाय

ब्रहस्पति

पहला घर :

  • यदि ब्रहस्पति पहले घर में हो तो जातक पर पितृऋण होता है । इसके लिए जातक को पितृऋण के उपाय करने चाहिए ।
  • किसी से दान न लें । अपने भाग्य पर भरोसा रखें ।

दूसरा घर

  • घर के सामने गड्ढ़े हों तो उन्हें भर दें ।
  • केसर और हल्दी का तिलक लगाएं ।

तीसरा घर

  • दुर्गा पूजन करें ।
  • बड़ों की सेवा कर उनसे आशीर्वाद प्राप्त करें ।

चौथा घर

  • अपनी बनियान पर लाल निशान बनाएं ।
  • बड़ों की सेवा करें ।
  • किसी के सामने स्नान न करें । अपने शारीर का प्रदर्शन न करें ।
  • पूजा स्थानों पर पूजा करें ।
  • कुल पुरोहित का आशीर्वाद प्राप्त करें ।
  • पीपल के वृक्ष को पानी से सींचे ।

पांचवां घर

  • किसी के भी दिए द्वारा दान न स्वीकारें । मंदिर का प्रसाद भी न लें ।
  • किसी से कोई वास्तु मुफ्त में न लें ।
  • सर पर छोटी ( शिखा ) रखें ।
  • साधुओं की सेवा करें । पूजा स्थानों की सफाई करें ।
  • साधुओं की सेवा करें । पूजा स्थानों की सफाई करें ।

छठा घर

  • ब्रहस्पति से संबंधित वस्तुएं मंदिर में अर्पत करें ।
  • अपने बच्चों के साथ या उनकी सलाह से व्यापर करें ।
  • मुर्गियां पालें या उन्हें दाना चुगाएं ।
  • मंदिर के पुजारी को वस्त्र दान दें ।

सातवां घर

  • घर में तुलसी की माला या देवी की प्रतिमा न रखें । दीवारों पर देवी-देवताओं के चित्र लगा सकते हैं ।
  • सोना या सोने के गहने पीले वस्त्र में बांधकर रखें । कुछ गहने अवश्य पहनें ।
  • पीताम्बरधारी साधुओं से दूर रहें ।

आठवां घर

  • आभुष्ण पहनें ।
  • मंदिर में या पूजा स्थान में आलू, कपूर और दही दें ।
  • द्वार पर आए भिखारी को कुछ-न-कुछ दें । उसे खली हाथ न लौटाएं ।

नौवां घर

  • पवित्र गंगा में स्नान करें । गंगाजल पियें ।
  • स्वयं तीर्थयात्रा करें । दूसरों की तीर्थयात्रा के लिए सहयोग दें ।
  • धर्म में श्रद्धा रखें । सत्य बोलें ।

दसवां घर

  • काम शुरू करने से पहले अपनी नाक साफ़ करें ।
  • 43 दिनों तक प्रतिदिन ताम्बे का सिक्का पानी में प्रवाहित करें ।

ग्यारहवां घर

  • पीले रुमाल का उपयोग करें ।
  • पिता द्वारा उपयोग में लाए पलंग और कपड़ों का उपयोग करें ।
  • पीपल के पेड़ को पानी से सींचें ।

बारहवां घर

  • किसी को ठगें नहीं  ।
  • झूठी गवाही न दें ।
  • गुरु, साधू और पीपल की सेवा करें ।

समस्त घरों हेतु उपाय

  • ब्रहस्पति का व्रत रखें ।
  • हरि पूजा कर पानी से पीपल को सींचें ।
  • हल्दी का टुकड़ा पीले धागे से बंधकर बाजू पर बंधें ।
  • चाँदी के बर्तन पर हल्दी का तिलक लगाकर रखें ।
  • ब्राह्मण, साधू, कुलगुरु की सेवा करें ।
  • गरुड़ पूरण का पाठ करें ।
  • पीले फूलों के पौधे लगाएं ।
  • ब्रहस्पति नीच का हो या एनी कारणों से अनिष्ट बनता हो तो ब्रहस्पति से संबंधित चीजों का दान करें ।

सूर्य

सोना और तांबा सूर्य की धातु है । शारीरिक द्रष्टि से मानवीय शारीर पर सूर्य का अधिकार माना गया है । किन्तु दाहिनी आँख और हड्डियों पर सूर्य का विशेष अधिकार होता है । सरकारी सिवा, सर्कार ( दरबार ) से संबंधित कार्य, मटमैले रंग की शराब, आम, दीपक, फलों से युक्त वृक्ष, नमक, गुड, गेहूं, बाजरा, बरगद और इकलौता पुत्र सूर्य के अधिकार क्षेत्र में आते हैं ।

सामान्य उपाय

पहला घर

  • सच्चरित्र और सदच्री बनें ।
  • घर के बाई और अंतिम सिरे में अँधेरा कमरा बनाएं ।

दूसरा घर

  • पैत्रक माकन में एक हैडपंप लगवाएं ।
  • चावल, चाँदी, दूध, आदि चन्द्र से संबंधित वस्तुएं दान में न लें ।
  • मुफ्त्त में किसी से कुछ न लें ।
  • अपने चरित्र का संवर्धन करें ।
  • नारियल, त्टेल और अखरोट मंदिर में अर्पण करें ।

तीसरा घर

  • अंधों को भोजन खिलाएं ।
  • मांस-मदिरा का सेवन न करें ।
  • तांबे का सिक्का खाकी रंग के धागे में बंधकर गले में धारण करें ।

पांचवां घर

  • झूंठ न बोलें । किसी का बुरा न चाहें ।
  • अपने वचन ( वादे ) को निभाएं ।
  • पुराने रीत-रिवाजों का पालन करें ।
  • बंदरों को गुड खिलाएं ।
  • साला, दामाद, भानजे की सेवा करें ।

छठा घर

  • बंदरों को गेहूं और गुड से बनी मिठाई खिलाएं ।
  • दीमक को सप्त अनाज दें । उन्हें खुली जगह में पेड़ के निचे रखें ।
  • नदी का पानी या चाँदी का टुकड़ा अपने पास हमेशा रखें ।
  • माँ-दादी दे पैर धोकर चरण स्पर्श करके आशीर्वाद लें ।

सातवां घर

  • रात का भोजन बन जाने के बाद चूल्हे को दूध छिडक कर बुझाएं । चूल्हे का उपयोग पुनः दुसरे दिन सुबह ही करें ।
  • तांबे के चौकोर टुकड़े जमीं में दबा दें ।
  • काली या बिना सिंग की गे को भोजन दें ।
  • कार्यारंभ से पहले मिट्ठी खाकर पानी पिएं ।
  • भोजन बनात्ते समय चूल्हे की जलती हुई आग में रोटी के कुछ टुकड़े डालें ।

आठवां घर

  • घर का मुख्य द्वार दक्षिनाभिमुखी न बनवाएं ।
  • सफ़ेद गे पालें ।
  • सदाचारी, शीलवान बनें ।
  • ससुराल में कायम न रहें ।
  • बड़े भाई, माता और गोमाता की सेवा करें ।

नौवां घर

  • रसोई तथा भोजन के लिए पीतल के बर्तनों का उपयोग करें ।
  • चावल, चाँदी और दूध का दान न लें ।
  • अतिसह्न्शील भी न रहें और न गुस्सैल ही बने ।

दसवां घर

  • सर पर सफ़ेद टोपी पहनें ।
  • पैत्रक घर में हैंडपंप लगाएं ।
  • मग्मैले रंग की गे की सेवा करें ।

ग्यारहवां घर

  • मछली न पकड़ें, न ।खाएं मांस-मदिरा का सेवन न करें ।
  • कभी झूठ न बोलें ।
  • कसाई से बकरा या बकरी खरीदकर उन्हें स्वतंत्र करें ।

बारहवां घर

  • मैकेनिक का व्यवसाय न करें ।
  • घर में आंगन अवश्य्य बनवाएं ।

समस्त घरों हेतु उपाय

  • रविवार का उपवास रखें ।
  • हरिवंश पूरण स्वयं पढ़ें या सुनें ।
  • गेहूं, गुड और तांबा दान में दें ।
  • सदाचारी एवं चरित्रवान बनें ।
  • तांबे की अंगूठी पहनें ।
  • तांबे के सिक्के बहते पानी में प्रवाहित करें ।
  • कालाबाजारी न करें । कालाबाजारियों से दूर रहें ।
  • सूर्य उच्च हो तो सूर्य से संबंधित चीजों का दान करें ।
  • सरकारी अफसरों की क्रपा प्राप्त करें ।