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daan ke prakar


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Categories : Samudrik Shastra

।। Daan ke prakar ।।

आमतौर पर सभी धर्मों में दान देने की प्रथा वर्षों से चली आई है । गृह मनुष्य के जीवन पर शुभ-अशुभ प्रभाव डालते हैं, यह बात विवाद के परे है । ग्रहों को अनुकूल करने के लिए स्नान, पूजा, जाप और दान ये चार मुख्य उपाय हैं ।

लाल किताब का सम्पूर्ण आधार उपाय और दान ही है । दान देने से अशुभ भी हो सकता है, यह बात केवल लाल किताब ने उजागर की है । दान देने से उसका पुन्य मिलने की जगह नुक्सान होता है, यह बात अक्सर देखने में आई है । बड़ी-बड़ी धर्मशालाएं ध्वस्त या खण्डहर हुई खड़ी हैं । मंदिर-मस्जिद भी खंडहर के रूप में दिखाई देते हैं । दान लेकर अपनी आजीविका चलनेवालों को अनेकों पीढियां बर्बाद हो गई हैं । इस लिए लाल किताब ने दान देने और लेने के बारे में ख़ास फरमान निकाला है ।

जातक की जन्मकुंडली में जो गृह अपने घर का और उच्च हो, उस गृह का दान जातक को नहीं करना चाहिए ।

उदाहरण :-

किसी जातक की जन्मकुंडली में चन्द्र 2, 4 में है तो उसे दूध, चावल, चाँदी या मोती का दान कभी नहीं करना चाहिए ।

इसी प्रकार किसी की जन्मकुंडली में मंगल श्रेष्ठ स्थिति में बैठा है तो उसे मिठाई का दान नहीं करना चाहिए ।

बुध श्रेष्ठ वाले जाजक को साबुत मूंग, हरा कपडा, कमल, फूल, मशरूम तथा घड़ा आदि का दान नहीं करना चाहिए । किसी का सूर्य उच्च का हो तो गुड, गेंहू का दान उसे नहीं करना चाहिए ।

ब्रहस्पति उच्च और शुभ हो तो सोना, पिली चीजें, पुस्तक का दान नहीं करना चाहिए ।

शुक्र उच्च का और शुभ हो तो सिले हुए कपडे कान नहीं करने चाहिए । शनि उच्च और शुभ हो तो शराब, मांस, अंडे, तेल और लोहे का दान नहीं करना चाहिए ।

इसी प्रकार उपरोक्त गृह अशुभ या नीच हो तो इन ग्रहों की वस्तुओं का दान या ये चीजें मुफ्त में नहीं लेनी चाहिए ।

मंदिर जाना वर्जित 

जब किसी जातक की जन्मकुंडली का दूसरा घर खली हो और उसके आठवें घर में पापी गृह, विशेष रूप से शनि बैठा हुआ हो तो उस जातक को मंदिर में नहीं जाना जाहिए । मंदिर के बहार से वह अपने इष्ट देवता को प्रणाम कर सकता है ।

6. 8, 12 में शत्रु गृह बैठे हों और बारहवां घर खली हो तो भी जातक को मंदिर नहीं जाना चाहिए ।

किसको क्या हानि होगी ?

चन्द्र छठे घर में हो तो एसा जातक यदि दूध या पानी का दान करे कुआँ, तलाब, नल, प्याऊ बनवाये या इनकी मरम्मत करवाएं तो दिन-व्-दिन उसका परिवार घटेगा । म्रत्यु सर पर मंडराएगी ।

शनि आठवें घर में हो तो एसा जातक यात्री धर्मशाला, निवास, बनाये तो स्वयं बेघर और निर्धन बन जाता है ।

शनि पहले घर वृहस्पति पांचवें घर में हो तो एसा जातक यदि भिखमंगे को तांबे का पैसा या तांबे का बर्तन दे तो उसकी सन्तान का नाश होता है ।

ब्रहस्पति दसवें और चन्द्र चोथे घर में हो तो एसा जातक पूजास्थल, मंदिर बनवाये तो झूठे आरोपों के तहत उसे फांसी लग जाती है ।

नोवें घर में शुक्र् वाला जातक अगर अनाथ बच्चे को गोद ले या उन्हें अपने पास रखे तो उसकी मिटटी पलीद होती है ।

बारहवें चन्द्र वाला जातक यदि धर्मात्मा या साधु को रोज रोटी खिलाये या दूध पिलाये या बचों के लिए निशुल्क शिक्षा का प्रवंध करे या स्कूल, पाठशाला खोले तो उसकी एसी दुर्गति होती है कि उसके अंत समय में उसे कोई पानी देनेवाला नहीं  होता ।

सातवें घर में ब्रहस्पति वाला जातक यदि किसी को वस्त्र दान करे तो वह खुद निर्वस्त्र हो जाता है ।

सूर्य 7, 8 घर में हो तो एसा जातक सुबह-शाम दान करें तो वह दान जहर के बराबर असर करता है।

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