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Budh Rekha


“बुध पर्वत” व् “बुध रेखा”

चतुर्थ पर्वत बुध पर्वत से सम्बन्ध रखता है और उसकी पहिचान बुध पर्वत और बुध की अंगुली से होती है. ऐसे जातक के गुण एवं उसकी विशेषताएं सदैव स्पस्ट होती हैं और वह एक मुंह वक्ता, बैज्ञानिक, चिकित्सक या वकील बनता है और व्यापर-व्यवसाय में भी उसे बढ़ी सफलता मिलती है.

जल्दी ही बेईमानी का रास्ता चुनने वाले इस प्रकार के जातक का हाथ देखकर सबसे पहले यह पता लगाना चाहिए की उसके विकास की प्रबलतम अवस्था कौन सी है और शुभ या अशुभ में से कौन सा पक्ष प्रभावी है. जहाँ तक इस पर्वत प्रकार के भले पक्ष का सम्बन्ध है, यह सर्वोत्क्रष्ट है और सभी प्रकारों में इसे सबसे अधिक सफल माना जाता है, किन्त्तु इसके साथ ही यह भी सच है कि बुध प्रधान जातक से बड़ा कोई झूठा, बदमाश या धोखेबाज नहीं मिल सकता. इसी कारण इस प्रकार के बारे में ध्यानपूर्वक विचार करने की आवश्यकता होती, क्योकि इस वर्ग में अन्य पर्वतों की तुलना में अधिक भिन्न तत्व सम्मिलित होते हैं.

चतुर एवं ज्ञानवान होने के साथ ही मानव प्रक्रति का जानकार होने से बुध प्रधान जातक को आमतौर पर सफलता मिलती रहती है. इस लिए भी कि वह अपने हाथों का कुशलता से उपयोग करना जानता है एवं उसके अन्दर काम करने की अथक शक्ति होती है. विधि और चिकित्सा के व्यवसाय उसके स्वभाव के अनुकूल होते हैं, क्योंकि विशेषकर पहले वाले व्यवसाय में वह अपनी स्वाभाविक चतुराई, सूझ-बूझ एवं अभिव्यक्ति की दक्षता का बड़ी सहजता से उपयोग कर सकता है.

बुध प्रधान जातक बढ़िया लेखक और चत्तुर व्यापारी होते हैं. वे इन दोनों क्षेत्रों में बड़ी सफलता हासिल करते हैं. अलग-अलग या संयुक्त चिन्ह, नक्षत्र, त्रिकोण, व्रत, एकमात्र उठती हुई रेखा, त्रिशूल या वर्ग बुध पर्वत को शक्तिशाली बनाते हैं. तिरछी रेखा, जाल, गुणन चिन्ह, द्वीप या बिंदु से पर्वत के स्वास्थ्य सम्बन्धी या चारित्रिक दोषों का पता चलता है. नाखूनों की रंगत से पता चलता है कि उन विकारों का सम्बन्ध किससे है. यदि बुध पर्वत सुविकसित हो, अंगुली लम्बी और बड़ी हो और पर्वत का शिर्शविंदु केंद्र से स्थित हो, तो जातक निश्चय ही बुध परिवार का होता है.बुध परिवार के जातक का कद छोटा ( औसतन पाँच फुट छः इंच के लगभग ) शारीर गठा हुआ, दिखने में चुस्त-दुरुस्त, साफ़-सुथरा और मुखमुद्रा प्रभावशाली लगती है. उसका चेहरा अण्डाकार होता है, नाक-नक्श सामान्य एवं संयमित होता है तथा उसकी मुद्रा जल्दी-जल्दी बदलती है, जो उसके मनोभावों को व्यक्त करती है. उसकी त्वचा चिकनी, उत्तम और पारदर्शी तथा कुछ-कुछ जैतून के रंग जैसी होती है. उत्तेजित ओर व्याकुल या डरा हुआ होने की दशा में ऐसे जातक की त्वचा के निचे बहता हुआ रक्त कभी लाल और कभी सफ़ेद नजर आता है. उसका माथा ऊँचा और उभरा हुआ होता है. बाल काले और सिरों पर छल्लेदार होते हैं.

बुध प्रधान जातक की दाढ़ी खूब निकलती है, जो उसके पुरे चेहरे को ढक लेती है. यदि दाढ़ी का रंग काले से भिन्न हो, तो यह बालों से कुछ अधिक गहरा होता है. वह अपनी दाढ़ी को ठोड़ी तक काट-छांटकर, संवार कर रखता है. भोंहें  मोंटी व् घनी नहीं होती, किन्तु उनकी बहरी रूप-रेखा सामान्य एवं व्यवस्थित होती है, जो कभी-कभी नाक के ऊपर आकर मिलती है. इस तरह की भोंहें अधिकतर शनि प्रधान जातकों की होती है. आँखें काली या गहरी काली होती हैं और उनसे बेचैनी व् व्याकुलता का भाव झलकता है तथा द्रष्टि एकदम तेज और तीक्ष्ण होती है. सीधी द्रष्टि डालने वाले ऐसे जातक संपर्क में आने वाले व्यक्ति का एक ही झलक में अन्वेषण करते हुए प्रतीत होते हैं.